नीचे अनेक ऐसे लोगों के बारे में दिया गया है जो अपनी मेहनत और दिमाग के दम पर बहुत बड़े आदमी बनें
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शिवम शुक्ला
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श्री इमरान अलवर से हैं
52 ऐप और 100 से ज्यादा वेबसाइट्स बनाने वाले इमरान के घर नहीं है TV
अलवर. 'मेरा हिंदुस्तान अलवर के इमरान में बसा है’। ये शब्द शुक्रवार रात करीब सवा बारह बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लंदन में कहे थे। उस वक्त इमरान सो रहा था। साढ़े बारह बजे उसके दोस्त राजेश ने फोन करके उठाया और कहा कि टीवी पर पीएम ने तेरा जिक्र किया है। इमरान ने बताया-दोस्त की बातें सुनकर ऐसा लगा, मानो गहरी नींद में ही मेरे सपने सच हो गए हों।
घर पर नहीं है टीवी
3 साल में 52 एंड्रॉयड एप और 100 से ज्यादा वेबसाइट्स तैयार करने वाले इमरान के घर टीवी नहीं है। उसने एप बनाने की किसी से ट्रेनिंग नहीं ली। बकौल इमरान, दोस्त की बातें सुनकर मैंने यूट्यूब पर मोदीजी का भाषण सुना। कोई कुछ समझ पाता, इससे पहले ही बधाइयों के फोन आने लगे।
बचपन से ही साइंस-मैथ्स का था जुनून
इमरान ने बताया कि बीएसएनएल के अधिकारी भी घर आए थे। मंत्री रविशंकर प्रसाद से बात कराई। मुझे बताया गया कि मुझे आजीवन मुफ्त ब्रॉडबैंड सर्विस दी गई है। इमरान ने बताया- बचपन से ही साइंस-मैथ्स का जुनून था। हम गरीब हैं, जैसे-तैसे 12वीं पूरी की। सपना वैज्ञानिक बनना था। घरवालों ने शादी कर दी। भैया की किताबों और गूगल से ऐप के आइडिया सीखे। अब तक 52 तरह के ऐप तैयार किए हैं। 25 लाख से ज्यादा लोग इन्हें डाउनलोड कर चुके हैं।
सबसे पहले बनाई जीके टॉक
इमरान ने बताया कि सबसे पहले मैने वेबसाइट जीके टॉक बनाई। इसे तत्कालीन कलेक्टर आशुतोष पेंडणेकर ने देखा और मुझे बुलवाया। उन्होंने एजुकेशनल ऐप का सुझाव दिया। मैंने कहा- मेरे पास एंड्राइड फोन नहीं है तो उन्होंने अपना टेबलेट दे दिया। तब से ऐप बना रहा हूं। ऐप संबंधी रोज 100 से ज्यादा ईमेल और फोन आते हैं। मेरी बेटी सामिया भी मेरी मदद करती है। ऐप्स की डिजाइन का काम सामिया ही देखती है।
मेरे ऐप्स देश को समर्पित
इमरान ने कहा-सुबह उठते ही मुझे अखबार पढ़ने का शौक है। इसके बाद स्कूल और फिर दिन-भर कम्प्यूटर में बीत जाता है। सारे ऐप्स मानव विकास मंत्रालय की वेबसाइट से डाउनलोड किए जा सकते हैं। मेरा अगला कदम ऐप्स पर वीडियो अपलोड करना रहेगा। बच्चे वीडियो से जल्दी समझ जाते हैं।
इमरान ने कहा-सुबह उठते ही मुझे अखबार पढ़ने का शौक है। इसके बाद स्कूल और फिर दिन-भर कम्प्यूटर में बीत जाता है। सारे ऐप्स मानव विकास मंत्रालय की वेबसाइट से डाउनलोड किए जा सकते हैं। मेरा अगला कदम ऐप्स पर वीडियो अपलोड करना रहेगा। बच्चे वीडियो से जल्दी समझ जाते हैं।
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