दिसंबर 2015 तक भारत में इंटरनेट यूजर्स की संख्या 4020 लाख हो जाएगी। पिछले साल के मुकाबले इस संख्या में 49 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इंडस्ट्री बॉडी IAMAI (इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया) ने अपनी एक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया है।
IAMAI और IMRB (इंडियन मार्केट रिसर्च ब्यूरो) की रिपोर्ट में कहा गया है कि इनमें से लगभग 3060 लाख लोग अपने मोबाइल से इंटरनेट एक्सेस करेंगे। इस साल अक्टूबर में ये संख्या 2760 लाख थी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले साल जून तक इंटरनेट यूजर्स की संख्या 4620 लाख क्रॉस कर जाएगी। इसमें मोबाइस स्मार्टफोन से इंटरनेट यूजर्स की संख्या ज्यादा होगी। वर्तमान में इंडिया दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा इंटरनेट यूजर बेस है। दिसंबर के बाद अमेरिका को पीछे करते हुए इंडिया दूसरे नंबर पर पहुंच जाएगा। 6000 लाख इंटरनेट यूजर्स के साथ चीन दुनिया का सबसे बड़ा इंटनेट यूजर बेस है।
रिपोर्ट के अनुसार भारत में इंटरनेट यूजर्स की संख्या 100 लाख से 1000 लाख तक पहुंने में लगभग 10 साल से ज्यादा का समय लग गया। लेकिन ये आंकड़े महज 3 साल में 1000 लाख से 2000 लाख तक पहुंच गए। गौर करने वाली बात ये है कि ये संख्या मात्र 1 साल में 3000 से 4000 लाख यूजर्स तक पहुंच गई है। इन आंकड़ों से ये अंदाजा लगाया जा सकता है कि देश में इंटरनेट लिटरेसी कितनी तेजी से बढ़ रही है।
महिला उद्यमियों को प्रोत्साहित करने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्टार्ट अप इंडिया और डिजिटल इंडिया अभियान को गति देने के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ई-कॉमर्स का कारोबार करने वाले पोर्टलों से समझौते करने पर विचार कर रहा है। मंत्रालय के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। माना जा रहा है कि अमेरिका की ई-कॉमर्स कंपनी ई बे उस सूची में शामिल है, जिन्हें समझौते के लिए चुना गया है। अधिकारी ने कहा, 'इस पहल में साझेदार कौन होगा, इसके बारे में करीब करीब फैसला हो चुका है। अगले कुछ सप्ताह में अंतिम नामों के बारे में फैसला कर लिया जाएगा।' मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि महिलाओंं द्वारा बनाए गए उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए नए तरीकों की तलाश की जा रही है।
अधिकारी ने कहा, 'ऑफलाइन प्लेटफार्म पर हम पहले ही महिलाओं द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को बढ़ावा दे रहे हैं, जिनमें हैंडलूम हाउस, दिल्ली हाट जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। बहरहाल इनकी पहुंच सीमित है और हम चाहते हैं कि महिलाओं का उद्यम तेजी से बढ़े। इसलिए हम ई-कॉमर्स पोर्टलों से समझौता करने की कोशिश कर रहे हैं।' मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक उनके पास महिला उद्यमियों के आंकड़े होंगे और वे और भी महिलाओं को अपने उत्पादों के ऑनलाइन बिक्री के लिए प्रोत्साहित करेंगे। मंत्रालय अपने ई-कॉमर्स साझेदारों के साथ मिलकर विज्ञापन देगा और महिलाओं को उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री के महत्त्व को बताने का काम करेगा। पोर्टल पर महिलाएं अपने प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, हस्तशिल्प, फैशन, परिधान व अन्य सामग्री सीधे बेचने में सक्षम होंगी।
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